संक्षिप्त उत्तर: अधिक मास की सार्थक साधना छोटी, सात्त्विक और प्रतिदिन दोहराने योग्य होनी चाहिए। 17 मई से 15 जून 2026 तक एक स्पष्ट संकल्प लें, विष्णु या कृष्ण के नाम का जप करें और थोड़ा धार्मिक पाठ पढ़ें। साथ ही सप्ताह में दान दें, स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें और पूरे महीने किसी एक हानिकारक आदत को कम करने का अभ्यास करें। इस महीने साधना की तीव्रता से अधिक उसकी निरंतरता महत्त्व रखती है।

यह योजना मुख्य अधिक मास 2026 मार्गदर्शिका का व्यावहारिक रूप है। इसका उद्देश्य पूजा को बोझिल बनाना नहीं, बल्कि जप, पाठ, दान और आत्म-सुधार को ऐसी दिनचर्या में रखना है जिसे व्यस्त परिवार भी सहजता से निभा सके।

सरल संकल्प लें

संकल्प के लिए एक वाक्य पर्याप्त है: "पुरुषोत्तम मास में मैं प्रतिदिन स्मरण और एक सुधार के माध्यम से श्री हरि की ओर लौटूँगा।" इसे इतना बड़ा न बनाइए कि कुछ दिनों बाद निभाना कठिन हो जाए। जब व्रत अहंकार दिखाने का साधन बनने लगे, तो साधना पीछे छूट जाती है। इसके विपरीत, विनम्र, स्पष्ट और व्यावहारिक संकल्प ध्यान को साधना पर टिकाए रखता है।

दैनिक अभ्यास के स्तर

समयअभ्यासलाभ
5 मिनट"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जपमन को सात्त्विक ध्वनि में लौटाता है।
15 मिनटजप के साथ गीता, विष्णु सहस्रनाम या कृष्ण स्तुतिध्वनि, अर्थ और चिंतन को जोड़ता है।
साप्ताहिकदान, सेवा, मंदिर दर्शन या किसी की वास्तविक सहायताभक्ति को कर्म में बदलता है।
पूरा महीनाएक दोष कम करें, एक सात्त्विक आदत बढ़ाएँसाधना को व्यवहार में लाता है।

जप और पाठ-संग्रह

पूरे महीने के लिए एक ही पाठ चुनना अभ्यास को स्थिर बनाता है। आप विष्णु सहस्रनाम, मधुराष्टकम् या कृष्ण चालीसा में से कोई एक ले सकते हैं। हर दिन पूरा पाठ संभव न हो, तो उसका छोटा अंश पढ़ें। यदि संस्कृत समझना कठिन लगे, तो अर्थ पढ़कर उसी पर कुछ समय चिंतन करें। इस तरह पाठ केवल पूरा करने की वस्तु नहीं रहता, बल्कि जप के साथ मन को अर्थ से भी जोड़ता है।

दान, व्रत और स्वास्थ्य

दान ऐसा चुनें जो किसी के वास्तविक काम आए, जैसे भोजन या वस्त्र देना, शिक्षा में सहायता करना, मंदिर में सेवा देना, बुजुर्गों की देखभाल करना या किसी जरूरतमंद की मदद करना। इससे भक्ति निजी अभ्यास तक सीमित न रहकर सेवा के रूप में व्यवहार में उतरती है। व्रत भी स्वास्थ्य के विरुद्ध नहीं होना चाहिए। बीमारी, दवा, गर्भावस्था, अधिक उम्र या कठिन श्रम की स्थिति में हल्का व्रत रखें। सादा भोजन, मधुर वाणी, कम अपव्यय और नियमित जप भी इस संकल्प को निभाने के व्यावहारिक तरीके हैं।

महीने का समापन

अंतिम दिन धन्यवाद अर्पित करें और ईमानदारी से देखें कि इस महीने आपके अभ्यास और व्यवहार में क्या बदला। यदि बीच में कुछ दिन छूट गए हों, तो उनके लिए अपराधबोध न रखें। ध्यान इस बात पर दें कि कौन-सा छोटा अभ्यास वास्तव में टिक सका। उसी में से एक आदत 15 जून के बाद भी बनाए रखें, ताकि अधिक मास का प्रभाव केवल महीने तक सीमित न रहकर जीवन में दिखाई दे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक दिन छूट जाए तो?
अगले दिन बिना अपराधबोध के फिर शुरू करें। यह पूर्णता की परीक्षा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सुधार का महीना है।
परिवार साथ कर सकता है?
हाँ। दीप जलाना, छोटा पाठ करना और सप्ताह में दान देना मिलकर एक सुंदर पारिवारिक अभ्यास बन सकते हैं।

Paramarsh के साथ आगे बढ़ें

अधिक मास में केवल सामान्य उपायों तक सीमित रहने के बजाय अपनी कुंडली और दैनिक पंचांग से जुड़ी साधना चुनें, ताकि अभ्यास आपकी दिनचर्या और परिस्थितियों के अधिक अनुरूप हो।

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