स्तोत्र

मधुराष्टकम् Madhurāṣṭakam

मधुराष्टकम् वल्लभाचार्य (1479–1531) द्वारा रचित एक श्रेष्ठ संस्कृत काव्य है। शुद्धाद्वैत दर्शन के प्रवर्तक और पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभाचार्य ने इस अष्टक में श्री कृष्ण को 'मधुर-अधिपति' — मिठास

8 श्लोक · 5 मिनट पाठ · वैष्णव
1
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
उनके अधर मधुर हैं, वदन मधुर है, नयन मधुर हैं, हँसी मधुर है। हृदय मधुर है, चाल मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
2
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
उनका बोलना मधुर है, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, लीला मधुर है। चलना मधुर है, भ्रमण मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
3
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
उनकी वेणु मधुर है, चरण-रज मधुर है, हाथ मधुर हैं, चरण मधुर हैं। नृत्य मधुर है, सखा-भाव मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
4
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम् ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
उनका गाना मधुर है, पीना मधुर है, खाना मधुर है, सोना मधुर है। रूप मधुर है, तिलक मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
5
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम् ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
उनका काम करना मधुर है, तारना मधुर है, हरण करना मधुर है, रमण करना मधुर है। उगलना मधुर है, शांत करना मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
6
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
गुंजा-माला मधुर है, फूलों की माला मधुर है, यमुना मधुर है, लहरें मधुर हैं। जल मधुर है, कमल मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
7
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम् ।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, एकत्र होना मधुर है, मुक्त होना मधुर है। जो दिखता है मधुर है, जो शेष है मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।
8
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
ग्वाल-बाल मधुर हैं, गौएँ मधुर हैं, लाठी मधुर है, सृष्टि मधुर है। कुचला हुआ भी मधुर है, फला हुआ भी मधुर है — मधुर-अधिपति का सब कुछ मधुर है।