नक्षत्र देखें
27 चंद्र नक्षत्र, देवता, प्रतीक, पद और व्यक्तित्व संकेत पढ़ें।
मुख्य मार्गदर्शिकाएँ और लेख
इस आवश्यकता पर केंद्रित चयनित पाठ — गहराई और महत्व के अनुसार क्रमबद्ध।
27 नक्षत्र: वैदिक चंद्र भवनों की संपूर्ण मार्गदर्शिका
वैदिक ज्योतिष के सभी 27 नक्षत्रों को जानें, अर्थ, अधिष्ठात्री देवता, ग्रह स्वामी, प्रतीक, और आपका जन्म नक्षत्र आपके व्यक्तित्व के बारे में क्या बताता है।
लेखअपना जन्म नक्षत्र खोजें: आपका चन्द्र नक्षत्र आपके बारे में क्या प्रकट करता है
जन्म तिथि, सटीक समय और स्थान से अपना जन्म नक्षत्र खोजें। जानें कि चन्द्र नक्षत्र स्वभाव, प्रतिभा, सम्बन्ध, दैनिक व्यवहार और जीवन-समय को कैसे दिखाता है।
लेखविवाह हेतु नक्षत्र अनुकूलता चार्ट
विवाह के लिए नक्षत्र अनुकूलता जाँचें। अष्टकूट मिलान की 8-कूट प्रणाली, 36 गुण, नाड़ी दोष, भकूट और सम्पूर्ण कुंडली संदर्भ समझें। निर्णय में उनका स्थान जानें।
लेखनक्षत्र पाद विस्तार से: राशिचक्र के 108 चरण
वैदिक ज्योतिष में 108 नक्षत्र पाद, उनके तत्व, पुरुषार्थ, नवांश संबंध, समय-संवेदनशीलता और सटीक कुंडली-पठन में उनकी भूमिका सरल उदाहरणों सहित समझें।
लेखवैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि
अपनी वैदिक चंद्र राशि जानें, यह मन, भावना और दैनिक प्रतिक्रिया को कैसे दिखाती है, ज्योतिष इसे पहले क्यों पढ़ता है और नक्षत्र इसे कैसे सूक्ष्म बनाता है।
लेखनक्षत्र स्वामी: ग्रह शासक आपके भाग्य को कैसे आकार देते हैं
जानें कौन सा ग्रह किस नक्षत्र का स्वामी है और नक्षत्र स्वामी दशा-समय, भावनात्मक गठन तथा गहन कुंडली-पठन को जीवन-व्याख्या में कैसे दिशा देते हैं।
लेखगंडांत नक्षत्र: जल और अग्नि राशियों के बीच कर्म गाँठें
वैदिक ज्योतिष में गंडांत समझें: तीन जल-अग्नि संधि, छह पाद, जन्म प्रभाव, उपाय, और कुंडली में इनके सूक्ष्म फल व्यवहार में संतुलित ढंग से कैसे पढ़ें।
लेखअश्विनी नक्षत्र: अर्थ, कथा और उपाय
अश्विनी नक्षत्र 0°00′-13°20′ मेष में है। केतु, अश्विनी कुमार, चार पाद, स्वभाव, अनुकूलता, करियर संकेत और शास्त्रीय उपाय कुंडली-संदर्भ सहित समझें।
लेखभरणी नक्षत्र: अर्थ, पाद, व्यक्तित्व और उपाय
भरणी नक्षत्र (13°20′-26°40′ मेष): यम देवता, शुक्र शासक, योनि प्रतीक, चार पाद, व्यक्तित्व, अनुकूलता, उपाय और कर्म-रूपान्तरण का शास्त्रीय अर्थ।
लेखकृत्तिका नक्षत्र: अर्थ, पौराणिक कथा, व्यक्तित्व और उपायों की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
कृत्तिका नक्षत्र 26°40′ मेष से 10°00′ वृषभ तक है। इस पूर्ण मार्गदर्शिका में अग्नि, सूर्य-स्वामित्व, चार पाद, स्वभाव, अनुकूलता, उपाय और कुण्डली अर्थ समझें।
लेखरोहिणी नक्षत्र: अर्थ, पौराणिक कथा, व्यक्तित्व और उपायों की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका
रोहिणी नक्षत्र मार्गदर्शिका: 10°00′-23°20′ वृषभ, चन्द्र-शासित, प्रजापति देवता, शकट-वट प्रतीक, पाद, गुण, व्यक्तित्व, अनुकूलता, उपाय और आध्यात्मिक अर्थ।
लेखमृगशिरा नक्षत्र: अर्थ, पाद, पौराणिक कथा और उपाय
मृगशिरा नक्षत्र (23°20′ वृषभ-6°40′ मिथुन) का अर्थ, सोम-कथा, मंगल स्वामित्व, चार पाद, खोजी स्वभाव, अनुकूलता और शास्त्रीय उपाय विस्तार से समझें।
संबंधित अध्ययन पथ
इस क्षेत्र में दक्षता विकसित करने वाले व्यवस्थित अनुक्रम।
मुख्य शब्द
इन संसाधनों में बार-बार आने वाले शब्द।
नक्षत्र
27 नक्षत्रों में से एक, जो राशिचक्र को 13°20' के खंडों में विभाजित करता है।
शब्द कोशविंशोत्तरी दशा
सर्वाधिक प्रयुक्त वैदिक ग्रहीय दशा प्रणाली — जन्म के चन्द्र नक्षत्र पर आधारित 120 वर्षों का चक्र।
शब्द कोशनवग्रह
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
शब्द कोशसाढ़े साती
शनि का 7.5 वर्षों का वह गोचर जो चन्द्र राशि से 12वीं, चन्द्र राशि, और दूसरी राशि पर होता है।
शब्द कोशपञ्चाङ्ग
पाँच दैनिक तत्वों का वैदिक पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।
शब्द कोशतिथि
चन्द्र मास की 30 कलाओं में से एक, जो सूर्य और चन्द्र के बीच 12° के कोणीय अंतर को दर्शाती है।
शब्द कोशकरण
आधी तिथि (6° सूर्य-चन्द्र अन्तर), पञ्चाङ्ग के पाँच तत्वों में से एक।
शब्द कोशगण्डान्त
राशि और नक्षत्र विभाजन में जल और अग्नि राशियों की संधि के संवेदनशील बिन्दु।