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अनुकूलता एवं संबंध

Vedic compatibility analysis - Ashtakoot matching, doshas, Moon sign harmony, and marriage timing.

14 लेख
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  1. अष्टकूट मिलान: 8-कूट अनुकूलता प्रणाली

    अष्टकूट मिलान समझें: सभी 8 कूट, गुण अंकन, स्कोर श्रेणियाँ, भकूट और नाड़ी दोष निवारण तथा विवाह में 36-गुण प्रणाली का व्यावहारिक अर्थ और परामर्श में उसका उपयोग।

    9 मिनट
  2. विवाह में मांगलिक दोष: प्रभाव, उपाय और निरस्तीकरण नियम

    विवाह में मांगलिक दोष: इसके प्रभाव, 12+ निरस्तीकरण और शमन कारक, तथा परंपरागत उपाय संतुलित वैदिक दृष्टि से समझें। स्पष्ट विशेषज्ञ मार्गदर्शन।

    8 मिनट
  3. नाड़ी दोष: निरस्तीकरण नियम और व्यावहारिक उपाय

    नाड़ी दोष की व्याख्या: विवाह पर प्रभाव, निरस्तीकरण नियम, और उपाय। जानें कब समान-नाड़ी मिलान वास्तव में सुरक्षित है और कब गहन कुंडली समीक्षा चाहिए।

    7 मिनट
  4. चंद्र राशि प्रेम अनुकूलता: वैदिक सम्बन्ध मार्गदर्शिका

    वैदिक चंद्र राशि प्रेम और विवाह अनुकूलता मार्गदर्शिका। राशियों की तुलना करें, भावनात्मक सामंजस्य समझें, सम्बन्ध पैटर्न विवेक से पढ़ें और सही प्रश्न पूछें।

    9 मिनट
  5. विवाह में सातवाँ भाव: जीवनसाथी संकेत

    सातवें भाव से जीवनसाथी के संकेत, विवाह की गतिशीलता, सप्तमेश बल, कारक, मंगल दोष, D9 नवांश और संबंध-पैटर्न को वैदिक ज्योतिष में व्यावहारिक रूप से समझें।

    8 मिनट
  6. ज्योतिष में विवाह का समय: आपकी शादी कब होगी?

    विंशोत्तरी दशा, बृहस्पति-शनि गोचर, योग, नवांश और यथार्थवादी समय-खिड़कियों से विवाह समय कैसे पढ़ा जाता है, और भविष्यवाणी की सीमाएँ क्या हैं, यह भी समझें।

    9 मिनट
  7. काल सर्प दोष: 12 प्रकार, प्रभाव और उपाय

    काल सर्प दोष तब माना जाता है जब सातों शास्त्रीय ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर हों। 12 प्रकार, संदर्भगत कारक, उपाय और अनावश्यक भय के बिना संतुलित पठन समझें।

    13 मिनट
  8. पितृ दोष: कुंडली में पैतृक कर्म और उसके वास्तविक उपाय

    कुंडली में पितृ दोष: नवम भाव और सूर्य-राहु संकेत, पितृ पक्ष का सही समय, और भय, बढ़ी हुई भाषा या महँगी पूजा के बिना श्राद्ध-तर्पण के शास्त्रीय उपाय।

    13 मिनट
  9. गुरु चाण्डाल दोष: जब बृहस्पति राहु से मिलते हैं

    गुरु चाण्डाल दोष बृहस्पति-राहु की युति है। जन्म-कुंडली में इसके संकेत, श्रद्धा-विवेक पर प्रभाव, शमन के कारण, उपाय और संतुलित पठन यहाँ समझें।

    13 मिनट
  10. ग्रहण दोष: कुंडली में सूर्य-चंद्र और राहु-केतु की युति

    ग्रहण दोष में सूर्य-राहु, सूर्य-केतु, चंद्र-राहु और चंद्र-केतु युति का अर्थ, संबंधों पर संभावित प्रभाव, शमन-कारक और परंपरागत साधनाएँ विस्तार से समझें।

    13 मिनट
  11. शापित दोष: शनि-राहु युति का संतुलित पठन

    बाद की ज्योतिष परंपरा शनि-राहु युति को शापित दोष कहती है। कुंडली-संदर्भ, संभावित प्रभाव, शमन-कारक और परंपरागत उपाय सरल और संतुलित रूप में समझें।

    13 मिनट
  12. अंगारक दोष: मंगल-राहु संयोग और उसका पठन

    अंगारक दोष तब बनता है जब मंगल और राहु एक राशि में हों। इससे आवेग, संघर्ष और जोखिम बढ़ सकते हैं, पर बृहस्पति की दृष्टि, मंगल की गरिमा और दशा इसे नरम करते हैं।

    13 मिनट
  13. दोष-भङ्ग: कुंडली-दोषों पर संतुलित ज्योतिष दृष्टि

    शास्त्रीय ज्योतिष दोषों को भङ्ग, ग्रह-गरिमा, शुभ दृष्टि, नवांश और पूरी कुंडली के संदर्भ में पढ़ता है, डर-आधारित निर्णय या उपाय-भय की तरह नहीं।

    13 मिनट
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