दशा एवं गोचर
Planetary periods and transits - Vimshottari Dasha, Mahadasha, Antardasha, Sade Sati, and prediction techniques.
सभी लेख
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साढ़े साती: शनि के 7.5 वर्षीय गोचर की मार्गदर्शिका
साढ़े साती समझें: चंद्र राशि से शनि का 7.5 वर्षीय गोचर, तीन ढैय्या, राशि अनुसार प्रभाव, संतुलित उपाय, जीवन-चक्र और भय से परे परिपक्व दृष्टि।
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बृहस्पति गोचर प्रभाव: गुरु गोचर मार्गदर्शिका
जानें बृहस्पति गोचर सभी 12 चंद्र राशियों को कैसे प्रभावित करता है। गुरु गोचर का समय, अनुकूल भाव, और बृहस्पति गोचर के दौरान क्या अपेक्षा करें।
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सूर्य महादशा: प्राधिकार और दृश्यता का 6 वर्षीय काल
सूर्य महादशा: 6 वर्षों में प्राधिकार, दृश्यता, पितृ-कर्म, अहंकार-परीक्षाएँ, अंतर्दशा क्रम, स्वास्थ्य संकेत और शास्त्रीय उपाय जन्म सूर्य के बल से समझें।
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चंद्र महादशा: मन और भावना का 10 वर्षीय काल
चंद्र महादशा के 10 वर्ष मन, माता, पोषण, भावनात्मक संवेदनशीलता, अंतर्दशा क्रम और शास्त्रीय चंद्र उपायों को कैसे सक्रिय करते हैं, सरल भाषा में समझें।
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मंगल महादशा: कर्म, साहस और संघर्ष का 7 वर्षीय काल
मंगल महादशा के 7 वर्ष साहस, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन, संघर्ष, अंतर्दशा समय, जन्म-मंगल की स्थिति, शास्त्रीय प्रभाव और संतुलित उपाय कैसे सक्रिय करते हैं।
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राहु महादशा: महत्वाकांक्षा, भ्रम और सफलता के 18 वर्ष
राहु महादशा: विंशोत्तरी का 18 वर्षीय छाया-काल जो जीवन को शिखर तक उठा सकता है या बिखेर सकता है। प्रभाव, अंतर्दशाएँ, जन्मस्थिति, करियर, संबंध और उपाय।
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गुरु महादशा: विकास के 16 वर्ष
गुरु महादशा में बृहस्पति के 16 वर्ष: धर्म, ज्ञान, धन, संतान, विवाह, उपाय और अंतर्दशा-फल, सब जन्मकालीन गुरु की स्थिति से सरलता से समझें और दिशा पाएँ।
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बुध महादशा: बुद्धि और व्यापार के 17 वर्ष
बुध महादशा: संवाद, वाणिज्य, विश्लेषण और स्नायु-तंत्र के 17 वर्ष। जन्मकालीन बुध, अंतर्दशा, स्वास्थ्य-विषय और उपायों की सरल शास्त्रीय मार्गदर्शिका।
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केतु महादशा: वैराग्य, हानि और आध्यात्मिक जागरण के 7 वर्ष
केतु महादशा, विंशोत्तरी का 7-वर्षीय छाया-काल जो अचानक वैराग्य, समर्पण और भीतरी जागरण लाता है। शास्त्रीय प्रभाव, अंतर्दशाएँ, भाव-स्थितियाँ और उपाय।
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शुक्र महादशा: आनंद, कला और संबंध के 20 वर्ष
शुक्र महादशा: विंशोत्तरी चक्र की सबसे लम्बी, 20 वर्षीय अवधि। विवाह, कला, सौन्दर्य, वाहन, शरीर, और आनंद के माध्यम से ली जाने वाली शुक्र की सूक्ष्म परीक्षाएँ।
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शनि का प्रत्येक राशि में गोचर: 30-वर्षीय पूर्ण चक्र की व्याख्या
शनि प्रत्येक राशि में लगभग 2.5 वर्ष रहते हैं - चंद्र राशि से शनि गोचर कैसे पढ़ें, साढ़े साती की अवधि, और हर राशि के लिए शनि का धीमा पाठ क्रमबद्ध रूप से समझें।
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हर राशि में बृहस्पति: 12-वर्षीय गोचर चक्र और उसके वरदान
बृहस्पति प्रत्येक राशि में लगभग 13 महीने रहता है। हर राशि से गुरु की यात्रा क्या लाती है - आशीर्वाद, विस्तार, अति - और इसे अपनी कुंडली के लिए कैसे पढ़ें।
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राहु-केतु गोचर: हर 18-महीने की धुरी-परिवर्तन से क्या आता है
18 महीने का राहु-केतु धुरी-परिवर्तन सबसे नाटकीय गोचरों में से एक है। प्रत्येक नोडल धुरी (मेष-तुला, वृष-वृश्चिक आदि) कर्म को कैसे पुनः आकार देती है।
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वैदिक ज्योतिष में सूर्य और चंद्र ग्रहण
ज्योतिष में ग्रहण कैसे पढ़ें - सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को तीव्र राहु-केतु गोचर के रूप में। ग्रहण काल में पारंपरिक आध्यात्मिक अभ्यास क्यों किए जाते हैं।
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बुध वक्री: वैदिक दृष्टिकोण (पॉप-ज्योतिष से भिन्न)
वैदिक ज्योतिष में बुध वक्री का वास्तविक अर्थ - क्यों वक्री = बलवान माना जाता है, कमज़ोर नहीं; और पश्चिमी रेट्रोग्रेड के डर से अलग कैसे पढ़ें।
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Saturn Return, ढैया और साढ़े साती
Saturn Return, ढैया और साढ़े साती को अलग-अलग समझें: गणना, अवधि, चंद्रमा-आधारित शनि गोचर और पश्चिमी वापसी से उनका अंतर।
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निर्णयों के लिए गोचर कैसे पढ़ें: वैदिक पद्धति
गोचर से निर्णय का समय कैसे देखें: वर्तमान महादशा-अंतर्दशा पर बृहस्पति, शनि और राहु-केतु को परतों में पढ़ने की व्यावहारिक वैदिक विधि।
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अष्टकवर्ग: वैदिक बिंदु-गणना विधि
अष्टकवर्ग की संपूर्ण मार्गदर्शिका: सर्वाष्टकवर्ग, भिन्नाष्टकवर्ग, बिंदुओं की गणना, और कैसे यह शास्त्रीय वैदिक प्रणाली हर ग्रह को हर राशि में अंक देती है।
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जैमिनी ज्योतिष: कारक प्रणाली और चर दशा की व्याख्या
जैमिनी ज्योतिष की चर कारक प्रणाली समझें: आत्मकारक, अमात्यकारक, आठ चलायमान कारक, कारकांश और पाराशरी समय-पठन के साथ चर दशा का कुंडली में उपयोग।
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चर दशा: जैमिनी समय-निर्धारण पद्धति का चरण-दर-चरण मार्गदर्शन
जैमिनी चर दशा समझें: राशि-आधारित महादशा गणना, क्रम, पठन-विधि और विंशोत्तरी के साथ संयुक्त प्रयोग, कुंडली-पठन के उदाहरण और आत्मकारक की भूमिका सहित।
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अष्टोत्तरी दशा: 108 वर्ष का उपयोग
अष्टोत्तरी दशा कब उपयोग करें: राहु-लग्नेश का शास्त्रीय नियम, 108 वर्ष का आठ-ग्रहीय चक्र, अभिजित सहित गणना और विंशोत्तरी से तुलना, और कब इसे जाँचें।
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योगिनी दशा: 36 वर्षीय देवी-दशा पद्धति
योगिनी दशा 36 वर्षों का छोटा चक्र है, जिसका नाम आठ योगिनियों पर रखा गया है। उपयोग, गणना-तर्क और इसकी सूक्ष्म घटना-समय शक्ति को सरल ढंग से समझें।
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प्रश्न (होरारी) ज्योतिष: प्रश्न को पढ़ना, कुंडली को नहीं
प्रश्न की कला, जिस क्षण कोई सच्चा प्रश्न पूछा जाता है, उस क्षण की कुंडली बनाकर उत्तर पढ़ना, केरल परंपरा की गहराई, और कब होरारी ज्योतिष उपयुक्त है।
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ताजिक वर्षफल: वैदिक ज्योतिष में वार्षिक भविष्यवाणी
ताजिक वर्षफल में वार्षिक चक्र कुंडली, मुन्था, सहम, वर्षेश चयन, ताजिक योग और दशा-गोचर के सहारे एक वर्ष का समय-निर्धारण कैसे पढ़ा जाता है, समझें।
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KP ज्योतिष: कृष्णमूर्ति पद्धति की व्याख्या
KP ज्योतिष को सब-लॉर्ड सिद्धांत, कस्पल सब-लॉर्ड, प्लासीडस कस्प और कृष्णमूर्ति पद्धति के रूलिंग प्लैनेट्स कार्यप्रवाह से साफ़ उदाहरणों सहित समझें।
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महादशा प्रभाव: नौ ग्रहों की प्रमुख अवधि जीवन को कैसे आकार देती है
विंशोत्तरी की सभी 9 महादशाओं का अन्वेषण - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। हर प्रमुख अवधि जीवन को कैसे आकार देती है, यहाँ जानें।
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अंतर्दशा (भुक्ति): महादशा की उप-अवधियाँ
वैदिक ज्योतिष में अंतर्दशा (भुक्ति) उप-अवधियों को समझें - महादशा के भीतर उनका काम, गणना विधि, संयोजन और प्रत्यंतर्दशा से समय-पठन, व्यावहारिक उदाहरण सहित।
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राहु-केतु गोचर: 18-महीने का नोडल अक्ष
राहु-केतु गोचर चक्र समझें: 18-महीने का नोडल अक्ष, भाव-दर-भाव प्रभाव, नोडल रिटर्न, विंशोत्तरी दशा से संबंध, और जीवन के दो विपरीत क्षेत्रों का पठन।
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दशा और गोचर को साथ कैसे पढ़ें: भविष्य-कथन की ज्योतिषीय तकनीकें
विंशोत्तरी दशा, गोचर, धीमे ग्रह और दोहरे-संकेत नियम को साथ पढ़कर वैदिक ज्योतिष में जीवन-घटनाओं का समय समझने की साफ़, संतुलित और व्यावहारिक विधि।