अभ्यास और भक्ति
चालीसा, आरती, स्तोत्र, देवता संबंध और दैनिक अभ्यास संसाधन खोजें।
मुख्य मार्गदर्शिकाएँ और लेख
इस आवश्यकता पर केंद्रित चयनित पाठ — गहराई और महत्व के अनुसार क्रमबद्ध।
अधिक मास 2026: पुरुषोत्तम मास की पूर्ण मार्गदर्शिका
अधिक मास 2026 की तिथियाँ, पंचांग logic, पुरुषोत्तम मास का अर्थ, क्या करें-क्या न करें, और विष्णु उपासना, दान, जप व आंतरिक संतुलन की सरल साधना।
मार्गदर्शिकाचेतना के विज्ञान के रूप में ज्योतिष: एक वेदांत मार्गदर्शिका
ज्योतिष और वेदांत का मिलन, कुंडली को भाग्य का फ़ैसला नहीं, बल्कि चेतना का नक्शा मानकर पढ़ना, और आत्म, ब्रह्मांड एवं कर्म के संबंध को आत्म-ज्ञान के मार्ग के रूप में देखना।
लेखसमुद्र मंथन: सागर का मंथन और राहु-केतु का जन्म
समुद्र मंथन से राहु-केतु की उत्पत्ति तक, यह लेख पुराण, ग्रहण खगोलिकी और राहु-केतु संकेतों की ज्योतिषीय व्याख्या क्रमबद्ध तरीके से स्पष्ट करता है।
लेखशनि और सूर्य: सूर्य-शनि पिता-पुत्र कथा
यह लेख पौराणिक कथा से कुंडली-व्याख्या तक की यात्रा करता है: शनि और सूर्य के विरोध का कारण, और सूर्य-शनि अक्ष का जन्म-कुण्डली तथा गोचर में संकेत कैसे दिखता है।
लेखचंद्रमा, तारा और बुध: सूर्य-चंद्र के बीच बुध क्यों
चंद्रमा, तारा और बुध की पुराण कथा बुध के ग्रहस्वभाव का कारण बताती है, सूर्य से सामंजस्य, चंद्रमा से दूरी, तथा वाणी-बुद्धि में उसकी अनुकूलनशीलता।
लेखशुक्राचार्य: असुरों के गुरु और शुक्र का ज्योतिषीय अर्थ
शुक्राचार्य ने असुरों के गुरु बनने का जो निर्णय लिया, वही वैदिक ज्योतिष में शुक्र के सौंदर्य, कला, प्रेम और भोग-स्वरूप को समझने की कुंजी देता है।
लेखबृहस्पति: देवगुरु और ज्योतिष में गुरु ग्रह का अर्थ
बृहस्पति (गुरु) देवताओं के गुरु के रूप में, उनकी पौराणिक कथा, ज्योतिष में धर्म और ज्ञान का अर्थ, और गुरु को सबसे बड़ा शुभ ग्रह क्यों कहा जाता है।
लेखहनुमान और शनि: शनि राहत की कथा
हनुमान-शनि की भेंट, शनिवार उपासना, साढ़े साती और शनि उपायों को भय के बजाय भक्ति, सेवा, अनुशासन, कर्म-जिम्मेदारी और व्यावहारिक सुधार से समझने वाली कथा।
लेखमकर संक्रांति: सूर्य का मकर प्रवेश और प्रकाश की वापसी
मकर संक्रांति का खगोलीय और ज्योतिषीय अर्थ, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, शीत अयनांत से उसका पुराना संबंध, और भारत तथा नेपाल में इसका आध्यात्मिक महत्व।
लेखमहाशिवरात्रि और अंधकारमय चंद्र: भीतरी स्थिरता
महाशिवरात्रि अमावस्या से ठीक पहले की कृष्ण चतुर्दशी पर क्यों आती है, और अंधकारमय चंद्र रात्रि को ज्योतिष में गहरी आध्यात्मिक देहरी क्यों माना गया है।
लेखहोली, फाल्गुन और आनंदपूर्ण समर्पण का ज्योतिष
फाल्गुन पूर्णिमा पर होली, फाल्गुनी नक्षत्र क्षेत्र, होलिका की अग्नि, वसंत के रंग और आनंदपूर्ण समर्पण का ज्योतिषीय अर्थ, सरल अभ्यास और कुंडली संकेत सहित।
लेखराम नवमी: भगवान राम के जन्म की ज्योतिषीय व्याख्या
राम की पारंपरिक जन्म कुंडली, चैत्र शुक्ल नवमी, सूर्यवंश, अयोध्या और रामायण के ज्योतिषीय संदर्भ से धर्म, समय और साधना का आज के जीवन में अर्थ समझें।
मुख्य शब्द
इन संसाधनों में बार-बार आने वाले शब्द।
स्तोत्र
किसी देवता की प्रशंसा में संस्कृत स्तुति, जो आमतौर पर चालीसा से अधिक साहित्यिक और छंदबद्ध होती है।
शब्द कोशचालीसा
चालीस छंदों की भक्ति स्तुति, जो किसी देवता के गुणों की प्रशंसा करती है।
शब्द कोशआरती
दीपक लहराते हुए देवता की स्तुति का भक्ति अनुष्ठान; और उस अनुष्ठान में गाया जाने वाला भजन।
शब्द कोशनवग्रह
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रह: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।
शब्द कोशमन्त्र
एक पवित्र ध्वनि, अक्षर, शब्द या श्लोक जो आत्मिक परिवर्तन और सुरक्षा के लिए जप किया जाता है।
शब्द कोशभजन
ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और भक्ति व्यक्त करने वाला अनौपचारिक भक्ति गीत।
शब्द कोशयन्त्र
एक पवित्र ज्यामितीय आकृति जिसका उपयोग ध्यान के केंद्र या ज्योतिषीय उपाय के रूप में किया जाता है।
पवित्र पाठ और अभ्यास
इस उद्देश्य से जुड़े भक्ति संसाधन।
जय गणेश जय गणेश देवा
गणेश आरती — 'जय गणेश जय गणेश देवा' से प्रारम्भ होने वाली — भगवान गणेश की सर्वाधिक लोकप्रिय स्तुति है। पूजा के अन्त में की जाने वाली यह आरती
पवित्र पाठविष्णु सहस्रनाम
विष्णु सहस्रनाम महाभारत के अनुशासन पर्व (अध्याय १४९) में संकलित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसे मरणशय्या पर पड़े भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर
पवित्र पाठहनुमान बाहुक
हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास (लगभग १५३२–१६२३ ई.) की ४४ पदों की एक भावपूर्ण हिन्दी/अवधी रचना है, जो रामचरितमानस के रचयिता की सर्वाधिक आत्मी
पवित्र पाठमधुराष्टकम्
मधुराष्टकम् वल्लभाचार्य (1479–1531) द्वारा रचित एक श्रेष्ठ संस्कृत काव्य है। शुद्धाद्वैत दर्शन के प्रवर्तक और पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभा
पवित्र पाठॐ जय लक्ष्मी माता
लक्ष्मी आरती — 'ॐ जय लक्ष्मी माता' से प्रारम्भ होने वाली — धन, समृद्धि और शुभता की देवी लक्ष्मी की आराधना का सर्वप्रमुख गीत है। यह शुक्रवार,
पवित्र पाठजय अम्बे गौरी
दुर्गा आरती — 'जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी' से प्रारम्भ होने वाली — देवी दुर्गा की सर्वाधिक प्रिय आरती है। नवरात्रि, मंगलवार और दैनिक