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परामर्श पत्रिका · ज्योतिष मूल

वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

ज्योतिष के मूलभूत सिद्धांत — राशियाँ, ग्रह, भाव, और कुंडली पढ़ना कैसे शुरू करें।

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लेख: वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

ज्योतिष के मूलभूत सिद्धांत — राशियाँ, ग्रह, भाव, और कुंडली पढ़ना कैसे शुरू करें।

वैदिक ज्योतिष की मूल बातें सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

वैदिक ज्योतिष की संपूर्ण मार्गदर्शिका: आधुनिक जीवन के लिए प्राचीन ज्ञान

वैदिक ज्योतिष की मूल बातें सीखें: निरयण राशि, कुंडली, नक्षत्र, योग, दशाएँ और कर्म, चुनाव व समय की ज्योतिषीय समझ, आरंभिक पाठकों के लिए सरल उदाहरणों सहित।

वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

वैदिक ज्योतिष बनाम पाश्चात्य ज्योतिष: प्रमुख अन्तर समझाए

निरयन और सायन राशिचक्र, चन्द्र-सूर्य प्राथमिकता, नवग्रह, दशा, गोचर और पाश्चात्य ग्रहों से वैदिक-पाश्चात्य ज्योतिष का अन्तर स्पष्ट समझें। सही पद्धति चुनें।

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वैदिक जन्म कुंडली कैसे पढ़ें: शुरुआती लोगों के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका

वैदिक जन्म कुंडली को चरण-दर-चरण पढ़ना सीखें। इस शुरुआती-अनुकूल मार्गदर्शिका से अपनी कुंडली में भावों, ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों और दृष्टियों को समझें।

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वैदिक ज्योतिष में 12 राशियाँ: सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

वैदिक ज्योतिष की 12 राशियाँ जानें: अर्थ, स्वामी ग्रह, तत्त्व, गुण, ग्रह-गरिमा और कुंडली-पठन में राशि की भूमिका को यहाँ सरल उदाहरणों से समझें।

वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

लग्न (Ascendant) क्या है और यह सूर्य राशि से अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है

जानें वैदिक ज्योतिष में लग्न (Ascendant) का अर्थ, यह सूर्य राशि से अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है, और यह भावों, ग्रहों व जीवन-दिशा को कैसे आकार देता है।

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वैदिक ज्योतिष में 5 तत्व और 3 गुण: अपनी प्रकृति को समझें

वैदिक ज्योतिष में 5 तत्वों (पंच तत्व) और 3 गुणों की खोज करें। जानें कि अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल, आकाश और सत्व-रजस-तमस आपकी कुंडली को कैसे आकार देते हैं।

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ज्योतिष का इतिहास और उत्पत्ति: वेदों से आधुनिक अभ्यास तक

ज्योतिष को वैदिक कालगणना से वेदांग ज्योतिष, वराहमिहिर, पराशरी परंपरा, लाहिड़ी अयनांश और आधुनिक एफ़ेमेरिस तक गंभीर शास्त्रीय संदर्भ सहित समझें।

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मेष राशि: मंगल, अग्नि और कार्तिकेय

मेष राशि वैदिक ज्योतिष की मंगल-शासित पहली राशि है: सूर्य उच्च, शनि नीच, अग्नि तत्त्व, मेष लग्न, नक्षत्र, करियर, संबंध और सुरक्षित उपाय। पूर्ण मार्गदर्शन।

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वृषभ राशि: वैदिक ज्योतिष में नन्दी, स्थिरता और पवित्र समृद्धि

वृषभ राशि का वैदिक अर्थ: शुक्र स्वामित्व, 3° पर चन्द्र उच्च, नन्दी प्रतीक, कृत्तिका-रोहिणी-मृगशिरा, लग्न, करियर, संबंध, उपाय और संतुलित मार्गदर्शन।

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मिथुन राशि: वैदिक ज्योतिष में द्वैत, संचार और दिव्य क्रीड़ा

मिथुन राशि बुध की वायु और द्विस्वभाव राशि है, जहाँ भाषा, विनिमय, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु और नारद आदर्श मिलकर मानसिक चपलता तथा संबंध-बुद्धि बनाते हैं।

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कर्क राशि: वैदिक ज्योतिष में माता, संरक्षण और महासागरीय हृदय

कर्क राशि चन्द्र-शासित चौथी राशि है जहाँ गुरु उच्च होते हैं। नक्षत्र, कर्क लग्न, मातृ-आदर्श, मंगल नीच और चन्द्र उपाय गहराई से समझें, व्यावहारिक संकेतों सहित।

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सिंह राशि: सूर्य, धर्म और नेतृत्व

सिंह राशि वैदिक ज्योतिष में सूर्य स्वामित्व, स्थिर अग्नि, मघा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, नेतृत्व, व्यक्तित्व, करियर और उपायों की राशि है।

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कन्या राशि: वैदिक ज्योतिष में शुद्धता, सेवा और विश्लेषण की शक्ति

कन्या राशि बुध की राशि है, जहाँ बुध उच्च होता है। कन्या लग्न, नक्षत्र-क्रम, सेवा, विवेक, उपचार, सम्बन्ध, करियर और शास्त्रीय उपायों को समझें।

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तुला राशि: संतुलन, कर्म और धर्म

तुला राशि - शुक्र-शासित, शनि उच्च, सूर्य नीच। संतुलन, साझेदारी, न्याय, व्यापार और धर्म की तराजू का वैदिक ज्योतिषीय अर्थ नक्षत्रों सहित समझें।

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वृश्चिक राशि: मंगल, रुद्र और कुण्डलिनी

वृश्चिक राशि मंगल की स्थिर जल राशि है: चंद्रमा यहाँ नीच, केतु कुछ परंपराओं में उच्च, और इसका मार्ग रुद्र, रूपांतरण व कुण्डलिनी से जुड़ता है।

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धनु राशि: वैदिक ज्योतिष में धर्म, गुरु और आध्यात्मिक साधना

बृहस्पति-शासित धनु राशि धर्म, उच्च शिक्षा, दूर यात्रा, गुरु-कृपा और आध्यात्मिक खोज से जुड़ी है। यहाँ धनु लग्न के गुण, नक्षत्र और उपाय पढ़ें।

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मकर राशि: शनि, उच्च मंगल और काल

वैदिक ज्योतिष में मकर राशि: शनि स्वामी, मंगल उच्च, बृहस्पति नीच, मकर लग्न, नक्षत्र, उपाय और मकर संक्रांति का सार।

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कुम्भ राशि: वैदिक ज्योतिष मार्गदर्शिका

कुम्भ राशि शनि-शासित है; कुछ परम्पराओं में राहु सह-स्वामी माना जाता है। यह ज्ञान, नेटवर्क, सुधार, सामूहिक धर्म और समाज-सेवा की स्थिर वायु राशि है।

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मीन राशि: मोक्ष और मत्स्य

मीन राशि, बृहस्पति-शासित अंतिम राशि, मोक्ष, उच्च शुक्र, नीच बुध, मत्स्य प्रतीक और सागरीय करुणा को समझाती है।

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