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ग्रह एवं नवग्रह

The nine Vedic planets - their significations, dignity, strength, retrograde effects, and combustion.

30 लेख
संग्रह

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  1. सूर्य: वैदिक ज्योतिष में सूर्य - आत्मा, पिता, और दिव्य प्रकाश

    वैदिक ज्योतिष में सूर्य की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका। सूर्य की पौराणिक कथा, कारकत्व, प्रत्येक भाव और राशि में प्रभाव, मेष में उच्चत्व, शनि-सूर्य कथा, और उपाय।

    15 मिनट
  2. चन्द्र वैदिक ज्योतिष में: मन, माता, चन्द्रमा

    वैदिक ज्योतिष में चन्द्र को समझें: मन कारक, माता, स्मृति, विंशोत्तरी दशा का नक्षत्र-बीज, वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच, और चन्द्र-राशि का महत्व।

    15 मिनट
  3. वैदिक ज्योतिष में मङ्गल: मंगल, साहस और कार्तिकेय

    मङ्गल को मंगल ग्रह के रूप में समझें: साहस, भूमि, भाई, कार्तिकेय कथा, मकर उच्चत्व, कर्क नीचत्व, योग, दोष, दशा, विवाह-सूक्ष्मता और सुरक्षित उपाय।

    15 मिनट
  4. बुध: वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह

    वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह का सम्पूर्ण मार्गदर्शन: चन्द्र-तारा कथा, कन्या में उच्च, मीन में नीच, बुद्धि, वाणी, व्यापार, उपाय और बुधादित्य योग।

    15 मिनट
  5. बृहस्पति (गुरु): वैदिक ज्योतिष का महान शुभ ग्रह

    वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति (गुरु): भाव, राशि, गुरु-वापसी, गोचर, योग, उच्च-नीच, उपाय और कुण्डली में अर्थ की वरिष्ठ ज्योतिषीय व्याख्या व पूर्ण मार्गदर्शन।

    12 मिनट
  6. शुक्र: वैदिक ज्योतिष में शुक्र

    शुक्र ग्रह की विस्तृत मार्गदर्शिका: प्रेम, कला, विवाह, विलास, शुक्राचार्य कथा, मीन में उच्चत्व, कन्या में नीचत्व, महादशा और सुरक्षित उपाय सहित।

    15 मिनट
  7. शनि: वैदिक ज्योतिष में महान गुरु (शनिदेव)

    शनिदेव का सम्पूर्ण मार्गदर्शन: वैदिक ज्योतिष में शनि के बारह भावों में प्रभाव, साढ़े साती, शनि-प्रत्यावर्तन, उपाय, और शनि-ऊर्जा के साथ कैसे कार्य करें।

    12 मिनट
  8. राहु: बिना धड़ का शीश - उत्तर नोड गाइड

    राहु चान्द्र उत्तर नोड और इच्छा, ग्रहण, विदेशीपन, तकनीक, वृषभ उच्च, वृश्चिक नीच, महादशा, योग और दुर्गा-गणेश-चन्दन उपायों व मन्त्र का छाया-ग्रह है।

    15 मिनट
  9. केतु: दक्षिण नोड और मोक्ष कारक

    केतु का दक्षिण चान्द्र नोड, समुद्र-मन्थन, मोक्ष कारकत्व, राशि-भाव फल, 7-वर्षीय महादशा और गणेश-शिव उपायों सहित वरिष्ठ ज्योतिषीय मार्गदर्शन व फलित संकेत।

    15 मिनट
  10. राहु और केतु: छाया ग्रहों (चंद्र-नोडों) को समझना

    वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु, छाया ग्रहों और चंद्र-नोडों को समझें। बारह भावों, अक्ष-पठन, दशा, योग, उपाय और कर्म-शिक्षा का स्पष्ट मार्गदर्शन।

    12 मिनट
  11. वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह: प्रभाव और व्याख्या

    वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रहों का अर्थ, वक्री बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि के प्रभाव, और कुंडली में उन्हें कैसे पढ़ें इसका स्पष्ट मार्गदर्शन।

    9 मिनट
  12. ग्रहों का बल (षड्बल): आपके ग्रह कितने बलवान हैं?

    षड्बल जानिए, वैदिक ज्योतिष में ग्रह-बल मापने की छह-आयामी प्रणाली, और समझिए कि आपके ग्रह वास्तव में कितने बलवान हैं और इसका आपकी कुंडली के लिए क्या अर्थ है।

    9 मिनट
  13. उच्च और नीच ग्रह: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की गरिमा

    वैदिक ज्योतिष में उच्च और नीच ग्रहों को समझें - संपूर्ण गरिमा प्रणाली, नीच भंग राज योग, और ये स्थितियाँ क्या अर्थ रखती हैं।

    9 मिनट
  14. अस्त ग्रह: जब ग्रह सूर्य के बहुत निकट आ जाते हैं

    वैदिक ज्योतिष में अस्त ग्रह समझें: अंश-सीमाएँ, ग्रहवार प्रभाव, और कब सूर्य का तेज किसी ग्रह को कमजोर करता है या कुंडली में उसकी दिशा बदलता है।

    7 मिनट
  15. ग्रहों की दृष्टि (Drishti): सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

    वैदिक ज्योतिष में ग्रह-दृष्टि कैसे काम करती है - सातवीं दृष्टि का आधार, मंगल-बृहस्पति-शनि की विशेष दृष्टियाँ, नोड मतभेद और कुंडली-संश्लेषण सहित।

    14 मिनट
  16. मंगल की विशेष दृष्टि: चौथे और आठवें भाव की दृष्टि

    मंगल सातवें भाव के साथ चौथे और आठवें भाव को क्यों देखता है, और उसकी विशेष दृष्टि कुंडली में घर, भीतरी शांति, संकट और रूपांतरण को कैसे आकार देती है।

    9 मिनट
  17. बृहस्पति की विशेष दृष्टियाँ: पंचम और नवम भाव की दृष्टि

    जानें कि बृहस्पति की पंचम और नवम दृष्टियाँ कैसे गिनी जाती हैं, वे बुद्धि और धर्म की रक्षा क्यों करती हैं, और ग्रह का बल कुंडली में फल कैसे बदलता है।

    9 मिनट
  18. शनि की विशेष दृष्टि: तीसरे और दसवें भाव की दृष्टि

    जानें कि कुंडली में शनि की तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि कैसे गिनी जाती है, और उसका प्रभाव प्रयास, संबंध और करियर पर ग्रहबल के साथ कैसे पढ़ा जाता है।

    9 मिनट
  19. दृष्टि-आधारित योग: जब ग्रहों की दृष्टियाँ मिलती हैं

    ग्रहों की दृष्टि से बनने वाले प्रमुख योग: परस्पर दृष्टि, शुभ-पाप संयोजन, राज और धन योग, और ये कुंडली के फल को कैसे बदलते हैं, इसे समझने की सरल विधि।

    10 मिनट
  20. राशियों में ग्रह: सम्पूर्ण अर्थ मार्गदर्शिका

    हर ग्रह बारह राशियों में कैसा व्यवहार करता है - राशि स्वामित्व, उच्चता, नीचता, गरिमा और अधिपति का वह तर्क जो वास्तविक ग्रह-राशि फल तय करता है।

    14 मिनट
  21. बारह राशियों में सूर्य

    राशि-दर-राशि जानें सूर्य (Surya) कैसे प्रकट होता है: पहचान, आत्मविश्वास, जीवनशक्ति, उच्च मेष, स्वराशि सिंह, नीच तुला और अधिपति-गरिमा का तर्क।

    12 मिनट
  22. बारह राशियों में चंद्रमा

    चंद्रमा सभी बारह राशियों में कैसे प्रकट होता है, वृषभ की उच्च शांति से वृश्चिक की नीच तीव्रता तक, और चंद्र राशि को मन, भावना और दशा के साथ कैसे पढ़ें।

    12 मिनट
  23. बारह राशियों में मंगल

    मंगल (Mangal) हर राशि में कैसे प्रकट होता है: मकर में उच्च, मेष और वृश्चिक में स्व-राशि, कर्क में नीच, और बाकी राशियों में ऊर्जा का अलग रंग।

    11 मिनट
  24. बारह राशियों में बुध

    वैदिक ज्योतिष में बुध प्रत्येक राशि में बुद्धि, वाणी और व्यापार को कैसे आकार देता है, साथ में उच्च-नीच, अस्त, अधिपति, नक्षत्र और पठन-पद्धति।

    11 मिनट
  25. बारह राशियों में बृहस्पति (गुरु)

    बारह राशियों में बृहस्पति (गुरु) कैसे काम करता है: ज्ञान, सौभाग्य, कर्क में उच्चता, मकर में नीचता, और हर राशि में विकास की अलग शैली सरल ढंग से समझें।

    11 मिनट
  26. बारह राशियों में शुक्र

    जानें कि वैदिक ज्योतिष में शुक्र बारहों राशियों में प्रेम, सौंदर्य और भोग को कैसे रंग देता है, और गरिमा, स्वामी व दशा से पठन कैसे और स्पष्ट होता है।

    11 मिनट
  27. बारह राशियों में शनि

    जानें कि शनि बारह राशियों में कैसे प्रकट होता है: अनुशासन, विलंब, गरिमा और परिपक्वता, उच्च तुला से नीच मेष और अपनी राशियों मकर-कुंभ तक, साफ़ और क्रमबद्ध ढंग से।

    11 मिनट
  28. बारह राशियों में राहु

    राहु बारह राशियों में कैसे प्रकट होता है: इच्छा, महत्वाकांक्षा, विदेशीपन, राशि-स्वामी और उच्च-नीच के विवादित अक्ष का शांत, व्यावहारिक ज्योतिषीय पठन।

    11 मिनट
  29. केतु बारह राशियों में

    केतु बारह राशियों में कैसे काम करता है: वैराग्य, अंतर्ज्ञान, पूर्वजन्म की दक्षता, विवादित उच्च-नीच, स्वामी से पठन और राहु-केतु अक्ष का आधार।

    11 मिनट
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