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परामर्श पत्रिका · पुराण ज्योतिष

पुराण एवं ज्योतिष

हिंदू पौराणिक कथाएँ जो वैदिक ज्योतिष की नींव हैं — ग्रहों की दिव्य कहानियाँ, देव-असुरों के युद्ध, और हर ग्रह के पीछे का आध्यात्मिक अर्थ।

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लेख: पुराण एवं देवता

हिंदू पौराणिक कथाएँ जो वैदिक ज्योतिष की नींव हैं — ग्रहों की दिव्य कहानियाँ, देव-असुरों के युद्ध, और हर ग्रह के पीछे का आध्यात्मिक अर्थ।

पुराण एवं देवता

समुद्र मंथन: सागर का मंथन और राहु-केतु का जन्म

समुद्र मंथन से राहु-केतु की उत्पत्ति तक, यह लेख पुराण, ग्रहण खगोलिकी और राहु-केतु संकेतों की ज्योतिषीय व्याख्या क्रमबद्ध तरीके से स्पष्ट करता है।

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शनि और सूर्य: सूर्य-शनि पिता-पुत्र कथा

यह लेख पौराणिक कथा से कुंडली-व्याख्या तक की यात्रा करता है: शनि और सूर्य के विरोध का कारण, और सूर्य-शनि अक्ष का जन्म-कुण्डली तथा गोचर में संकेत कैसे दिखता है।

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चंद्रमा, तारा और बुध: सूर्य-चंद्र के बीच बुध क्यों

चंद्रमा, तारा और बुध की पुराण कथा बुध के ग्रहस्वभाव का कारण बताती है, सूर्य से सामंजस्य, चंद्रमा से दूरी, तथा वाणी-बुद्धि में उसकी अनुकूलनशीलता।

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शुक्राचार्य: असुरों के गुरु और शुक्र का ज्योतिषीय अर्थ

शुक्राचार्य ने असुरों के गुरु बनने का जो निर्णय लिया, वही वैदिक ज्योतिष में शुक्र के सौंदर्य, कला, प्रेम और भोग-स्वरूप को समझने की कुंजी देता है।

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बृहस्पति: देवगुरु और ज्योतिष में गुरु ग्रह का अर्थ

बृहस्पति (गुरु) देवताओं के गुरु के रूप में, उनकी पौराणिक कथा, ज्योतिष में धर्म और ज्ञान का अर्थ, और गुरु को सबसे बड़ा शुभ ग्रह क्यों कहा जाता है।

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हनुमान और शनि: शनि राहत की कथा

हनुमान-शनि की भेंट, शनिवार उपासना, साढ़े साती और शनि उपायों को भय के बजाय भक्ति, सेवा, अनुशासन, कर्म-जिम्मेदारी और व्यावहारिक सुधार से समझने वाली कथा।

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शिव और केतु: वैराग्य, मौन और मोक्ष का ज्योतिष

शिव को केतु से क्यों पढ़ा जाता है: वैराग्य, भस्म, श्मशान-विवेक, मंत्र, मौन और कठिन केतु को स्थिर करने वाली उपासना, व्यावहारिक कुंडली-पठन के साथ।

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विष्णु: वैदिक ज्योतिष में धर्म और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के देवता

विष्णु को धर्म के पालनकर्ता, दशावतार को समयानुसार धर्म के रूप और विष्णु-उपासना को व्यवस्था, स्थिर लय और कृपा लौटाने वाले उपाय के रूप में समझें।

पुराण एवं देवता

लक्ष्मी और शुक्र: ज्योतिष में समृद्धि का पवित्र अर्थ

शुक्र की शक्ति के रूप में लक्ष्मी: पवित्र समृद्धि, अष्टलक्ष्मी, कुंडली संकेत, संबंध, धन-नीति और धर्ममय धन-सौंदर्य के लिए व्यावहारिक शुक्र उपाय।

पुराण एवं देवता

सरस्वती और बुध: वाक्, वाणी और पवित्र विद्या की शक्ति

ज्योतिष में बुध के पवित्र सहारे के रूप में सरस्वती को समझें: वाक्, सत्य वाणी, विद्या, मंत्र, शिक्षा कर्म और दैनिक जीवन के व्यावहारिक बुध उपाय।

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हनुमान और मंगल: निडर भक्ति का ज्योतिष

भक्ति से शुद्ध मंगल के रूप में हनुमान: साहस, अनुशासन, रक्षा, मंगल दोष उपाय, शनि दबाव, संबंध अग्नि और भय या भाग्यवाद बिना आचरण-केंद्रित कुंडली-पठन।

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दुर्गा और राहु: भ्रम तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

पीड़ित राहु के लिए दुर्गा उपासना क्यों कही जाती है: महिषासुर, नवदुर्गा, नवरात्रि, राहु-केतु संकेत और भ्रम में स्पष्टता लौटाने का शास्त्रीय मार्ग।

पुराण एवं देवता

कार्तिकेय और मंगल: दिव्य योद्धा और मंगल का ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष में मंगल के अधिष्ठाता देवता कार्तिकेय (मुरुगन), उनकी पौराणिक कथा, तमिल एवं नेपाली परंपराएँ, और मंगल की तीव्र अनुशासित ऊर्जा का गहरा अर्थ।

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गणेश और केतु: अहंकार की बाधाओं को हटाने वाली बुद्धि

कठिन केतु के लिए मूलभूत उपाय के रूप में गणेश-उपासना, गजमुख का रहस्य, छिन्न-मस्तक की प्रज्ञा, और आरंभ के देवता कैसे राह को निर्मल कर मन को स्थिर करते हैं।

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सूर्य नारायण: वैदिक ज्योतिष के दृश्य देव

वैदिक ब्रह्मांड में सूर्य दृश्य देव के रूप में, गायत्री मंत्र, आदित्य हृदयम्, और दुर्बल सूर्य के लिए दैनिक सूर्य नमस्कार को मूलभूत उपाय के रूप में समझें।

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