चेतना एवं वेदांत
Jyotish as a science of consciousness — Atman and Brahman, Advaita non-duality, Aham Brahmasmi, the states of awareness, Maya and the ego, and the soul's evolution through the chart.
सभी लेख
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आत्मन्: वैदिक कुंडली में आत्मा का पठन
आत्मन् (सच्चा स्वरूप) और जिस तरह ज्योतिष उसकी ओर संकेत करता है, सूर्य, आत्मकारक, तथा कुंडली में आत्मा और अहं-स्वरूप के बीच का अंतर।
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ज्योतिष में ब्रह्म और ब्रह्मांडीय चेतना
अद्वैत वेदांत में ब्रह्म, ब्रह्मांड-व्यक्ति अनुरूपता और पुरुष सूक्त की छवि समझें, तथा जन्म कुंडली को चेतना के व्यावहारिक दर्पण की तरह पढ़ना जानें।
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अहं ब्रह्मास्मि: कुंडली के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार
महावाक्य अहं ब्रह्मास्मि, “मैं ब्रह्म हूँ,” और जन्म-कुंडली को आत्म-साक्षात्कार की यात्रा में भविष्यवाणी नहीं, बल्कि चिंतन के दर्पण की तरह पढ़ने का मार्ग।
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अद्वैत वेदांत में ज्योतिष का स्थान क्या है?
अद्वैत वेदांत, ज्योतिष और जन्म कुंडली में मेल कैसे बैठता है: माया, भाग्य, स्वतंत्र इच्छा, और जीवन-स्वप्न के भीतर कुंडली का व्यावहारिक नक्शा।
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जीवात्मा और परमात्मा: वह मिलन जिसकी ओर कुंडली संकेत करती है
वैदिक चिंतन में जीवात्मा, परमात्मा, वेदांत की धाराएँ, और जन्म कुंडली बिना भाग्यवाद के आत्मा की परम स्रोत की ओर मिलन-यात्रा का नक़्शा कैसे बन सकती है।
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जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय और ग्रह
वेदांत के जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय को ज्योतिष में पढ़ें, जहाँ चंद्रमा, सूर्य, केतु और द्वादश भाव आंतरिक जीवन और चेतना को समझाते हैं।
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अहंकार: कुंडली में 'मैं' की संरचना को पढ़ना
अहंकार और आत्मा: सूर्य, चंद्रमा, बुध और लग्न 'मैं' का भाव कैसे दिखाते हैं, और बारहवाँ भाव व केतु उसकी पकड़ ढीली होने का संकेत कहाँ देते हैं।
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माया, भ्रम और राहु: वैदिक ज्योतिष में बोध
वेदांत में माया और राहु का ज्योतिषीय संबंध समझें: इच्छा, प्रक्षेपण, चमक, और कुंडली में रूपों के पार देखकर विवेक विकसित करने का व्यावहारिक मार्ग।
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आत्म विचार: स्व-अन्वेषण और कुंडली एक दर्पण के रूप में
रमण महर्षि की परंपरा में आत्म विचार (स्व-अन्वेषण), और कैसे जन्म कुंडली भविष्य बताने वाले यंत्र के बजाय स्व को देखने का दर्पण बनकर साधना को गहरा करती है।
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बारह भावों से होकर आत्मा की यात्रा
बारह भावों का वैदिक पठन, जिसमें आत्मा की यात्रा स्व-बोध और संबंधों से होकर कर्म, अर्थ, परिपक्व उत्तरदायित्व और अंतिम मुक्ति तक समझी जाती है।