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चेतना एवं वेदांत

Jyotish as a science of consciousness — Atman and Brahman, Advaita non-duality, Aham Brahmasmi, the states of awareness, Maya and the ego, and the soul's evolution through the chart.

11 लेख
संग्रह

सभी लेख

  1. आत्मन्: वैदिक कुंडली में आत्मा का पठन

    आत्मन् (सच्चा स्वरूप) और जिस तरह ज्योतिष उसकी ओर संकेत करता है, सूर्य, आत्मकारक, तथा कुंडली में आत्मा और अहं-स्वरूप के बीच का अंतर।

    12 मिनट
  2. ज्योतिष में ब्रह्म और ब्रह्मांडीय चेतना

    अद्वैत वेदांत में ब्रह्म, ब्रह्मांड-व्यक्ति अनुरूपता और पुरुष सूक्त की छवि समझें, तथा जन्म कुंडली को चेतना के व्यावहारिक दर्पण की तरह पढ़ना जानें।

    12 मिनट
  3. अहं ब्रह्मास्मि: कुंडली के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार

    महावाक्य अहं ब्रह्मास्मि, “मैं ब्रह्म हूँ,” और जन्म-कुंडली को आत्म-साक्षात्कार की यात्रा में भविष्यवाणी नहीं, बल्कि चिंतन के दर्पण की तरह पढ़ने का मार्ग।

    12 मिनट
  4. अद्वैत वेदांत में ज्योतिष का स्थान क्या है?

    अद्वैत वेदांत, ज्योतिष और जन्म कुंडली में मेल कैसे बैठता है: माया, भाग्य, स्वतंत्र इच्छा, और जीवन-स्वप्न के भीतर कुंडली का व्यावहारिक नक्शा।

    12 मिनट
  5. जीवात्मा और परमात्मा: वह मिलन जिसकी ओर कुंडली संकेत करती है

    वैदिक चिंतन में जीवात्मा, परमात्मा, वेदांत की धाराएँ, और जन्म कुंडली बिना भाग्यवाद के आत्मा की परम स्रोत की ओर मिलन-यात्रा का नक़्शा कैसे बन सकती है।

    11 मिनट
  6. जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय और ग्रह

    वेदांत के जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय को ज्योतिष में पढ़ें, जहाँ चंद्रमा, सूर्य, केतु और द्वादश भाव आंतरिक जीवन और चेतना को समझाते हैं।

    11 मिनट
  7. अहंकार: कुंडली में 'मैं' की संरचना को पढ़ना

    अहंकार और आत्मा: सूर्य, चंद्रमा, बुध और लग्न 'मैं' का भाव कैसे दिखाते हैं, और बारहवाँ भाव व केतु उसकी पकड़ ढीली होने का संकेत कहाँ देते हैं।

    11 मिनट
  8. माया, भ्रम और राहु: वैदिक ज्योतिष में बोध

    वेदांत में माया और राहु का ज्योतिषीय संबंध समझें: इच्छा, प्रक्षेपण, चमक, और कुंडली में रूपों के पार देखकर विवेक विकसित करने का व्यावहारिक मार्ग।

    11 मिनट
  9. आत्म विचार: स्व-अन्वेषण और कुंडली एक दर्पण के रूप में

    रमण महर्षि की परंपरा में आत्म विचार (स्व-अन्वेषण), और कैसे जन्म कुंडली भविष्य बताने वाले यंत्र के बजाय स्व को देखने का दर्पण बनकर साधना को गहरा करती है।

    11 मिनट
  10. बारह भावों से होकर आत्मा की यात्रा

    बारह भावों का वैदिक पठन, जिसमें आत्मा की यात्रा स्व-बोध और संबंधों से होकर कर्म, अर्थ, परिपक्व उत्तरदायित्व और अंतिम मुक्ति तक समझी जाती है।

    12 मिनट
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