समृद्धि
आध्यात्मिक उद्देश्य के अनुसार संकलित भक्ति पाठों का चयन।
गणेश चालीसा भगवान गणेश — शिव और पार्वती के हाथी-मुख वाले पुत्र और विघ्नहर्ता — को समर्पित एक चालीस-पद भक्ति-रचना है। इसमें एक आरम्भिक दोहा, …
गणेश आरती — 'जय गणेश जय गणेश देवा' से प्रारम्भ होने वाली — भगवान गणेश की सर्वाधिक लोकप्रिय स्तुति है। पूजा के अन्त में की जाने वाली यह आरती …
लक्ष्मी आरती — 'ॐ जय लक्ष्मी माता' से प्रारम्भ होने वाली — धन, समृद्धि और शुभता की देवी लक्ष्मी की आराधना का सर्वप्रमुख गीत है। यह शुक्रवार,…
श्री महालक्ष्म्यष्टकम् पद्म पुराण से उद्धृत एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसकी रचना देवराज इन्द्र ने देवी महालक्ष्मी की स्तुति में की थी। इसमें…
गणपति अथर्वशीर्ष — जिसे गणेशोपनिषद् भी कहते हैं — वैदिक भक्ति साहित्य में विशिष्ट स्थान रखता है। यह लघु उपनिषद् होते हुए भी दार्शनिक ग्रन्थ,…
कनकधारा स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य (8वीं सदी ई.) द्वारा रचित एक प्रसिद्ध 21-श्लोकीय स्तोत्र है। परंपरा के अनुसार बाल्यावस्था में शंकर जब भिक्ष…
श्री सूक्तम् लक्ष्मी को समर्पित सबसे प्राचीन वैदिक स्तुतियों में से एक है, जो ऋग्वेद के खिलानि (परिशिष्ट) में संकलित है। इसके पन्द्रह मूल मन…
कृष्ण चालीसा भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में रचा गया चालीस चौपाइयों का लोकप्रिय हिन्दी भक्तिकाव्य है। इसमें दो दोहों के मध्य चालीस चौपाइयाँ ह…